अधूरे सपनों की उड़ान – अध्याय 5 | पहली असफलता | हिंदी प्रेरणादायक उपन्यास
अध्याय 5 – पहली असफलता
मेहनत की राह पर हर कदम सीधा नहीं होता।
रामू ने पूरी लगन से तैयारी की थी। दिन में काम, रात में पढ़ाई— नींद और आराम से समझौता।
आख़िरकार वह दिन आ ही गया जब उसने पहली परीक्षा दी।
परीक्षा केंद्र के बाहर कई चेहरे थे— कुछ आश्वस्त, कुछ डरे हुए।
रामू ने गहरी साँस ली और मन ही मन बोला, “जो होगा, देखा जाएगा।”
परीक्षा ठीक हुई थी। कम से कम उसे ऐसा लगा।
दिन बीतते गए। फिर वह दिन आया जब परिणाम घोषित हुआ।
रामू साइबर कैफे पहुँचा। काँपते हाथों से रोल नंबर डाला।
स्क्रीन पर जो दिखा, वह उसके दिल पर सीधा वार था।
“अनुत्तीर्ण”
कुछ पल तक वह स्क्रीन को बस देखता रहा।
बाहर निकलकर वह देर तक खामोश बैठा रहा।
पहली बार उसके सपनों को गहरी ठेस लगी थी।
घर लौटते समय उसे लगा मानो पूरा रास्ता उससे सवाल कर रहा हो।
लेकिन उसी खामोशी में एक आवाज़ भी थी—
“यह अंत नहीं है।”
रामू जानता था, पहली असफलता आख़िरी नहीं हो सकती।
क्रमशः…
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