अधूरे सपनों की उड़ान – अध्याय 6 | टूटता हौसला | हिंदी प्रेरणादायक उपन्यास
अध्याय 6 – टूटता हौसला
पहली असफलता के बाद रामू के भीतर कुछ टूट सा गया था।
सुबह होते ही वह नीम के पेड़ के नीचे बैठा था, लेकिन आज किताब खुली नहीं थी।
आँखें खाली पन्नों पर थीं और मन अनगिनत सवालों से भरा हुआ।
“अगर अगली बार भी हार गया तो?”
यह सवाल बार-बार उसके दिमाग में घूम रहा था।
गाँव के कुछ लोग फिर ताने देने लगे—
“कहा था न, पढ़ाई से कुछ नहीं होता।”
हर ताना उसके हौसले पर एक चोट की तरह लगता।
उस दिन रामू ने पहली बार किताब बंद कर दी।
माँ ने यह देखा तो पास आकर बैठ गई।
“थक गया है बेटा?” माँ ने धीरे से पूछा।
रामू की आँखें भर आईं।
“माँ, कभी-कभी लगता है मैं कुछ नहीं कर पाऊँगा।”
माँ ने उसका हाथ थाम लिया।
“हौसला टूटना गलत नहीं है, लेकिन हार मान लेना गलत है।”
रामू चुप रहा, लेकिन उसके भीतर एक जंग चल रही थी।
क्या वह फिर उठेगा या यहीं रुक जाएगा?
क्रमशः…
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