अधूरे सपनों की उड़ान – अध्याय 4 | खाली जेब | हिंदी प्रेरणादायक उपन्यास

अध्याय 4 – खाली जेब

गरीबी की दीवार के बाद रामू की ज़िंदगी में एक और सच्चाई सामने खड़ी थी— खाली जेब।

उस दिन रामू शहर गया था। जेब में बस पचास रुपये थे और ज़रूरतें उससे कहीं ज़्यादा।

बस स्टैंड के पास स्थित किताबों की दुकान पर वह कुछ देर रुक गया। नई किताबों की खुशबू उसे अपनी ओर खींच रही थी।

दुकानदार ने पूछा, “क्या चाहिए?”

रामू ने हिचकते हुए कहा, “सरकारी नौकरी की तैयारी की किताब…”

दुकानदार ने कीमत बताई, “दो सौ रुपये।”

रामू की उँगलियाँ अनजाने में जेब टटोलने लगीं।

खाली।

उसने किताब को एक आख़िरी नज़र देखा और बिना कुछ कहे दुकान से बाहर निकल आया।

सड़क पर भीड़ थी, लेकिन रामू को खुद के भीतर एक अजीब सा सूनापन महसूस हुआ।

एक पल को उसके मन में आया, “क्या सपने सिर्फ़ अमीरों के लिए होते हैं?”

तभी उसे माँ के शब्द याद आए—

“बेटा, हौसला हो तो खाली जेब भी रास्ता बना लेती है।”

रामू ने मन ही मन एक फैसला कर लिया।

अगर साधन कम हैं, तो मेहनत दोगुनी होगी।

खाली जेब में पैसे नहीं थे, लेकिन उसके सपने अब भी ज़िंदा थे।


क्रमशः…

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